17 जून 2026 का पंचांग – तृतीया शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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17 जून 2026 का पंचांग

तृतीया | शुक्ल पक्ष | ज्येष्ठ

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तिथि
तृतीया
नक्षत्र
पुनर्वसु
🌿
योग
ध्रुव
📿
करण
तैतिल
शहर चुनें:
🌅 05:41 AM   🌇 07:14 PM

📅 पंचांग17 जून 2026

तिथितृतीया (शुक्ल पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारबुधवार
नक्षत्रपुनर्वसु (अदिति)
योगध्रुव
करणतैतिल
चंद्र राशिमिथुन
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:41 AM
🌇 सूर्यास्त07:14 PM

🪐 ग्रह दशा17 जून 2026

☀️सूर्यमिथुन1.6°
🌙चंद्रमिथुन28.4°
मंगलमीन25.2°
बुधकन्या24.8°
गुरुकर्क3.1°
शुक्रकन्या10°
शनिमीन18.8°
राहुकुंभ9.1°
केतुसिंह9.1°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌓

🌙 आज की तिथि का महत्व

तृतीया · शुक्ल पक्ष

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व्रत / पर्व: हरितालिका तीज, गणगौर, सौभाग्य तृतीया

तृतीया माँ गौरी की प्रिय तिथि है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह विशेष पुण्यदायी है और सौभाग्य की रक्षा करती है।

✅ आज क्या करें

माँ पार्वती की पूजा, सुहागिनें व्रत रखें, हरे वस्त्र पहनें

⚠️ आज से बचें

मांसाहार, व्यसन

⭐ आज का नक्षत्र: पुनर्वसु

देवता: अदिति

पुनर्वसु नवीनता का नक्षत्र है। बहुत शुभ — सफलता और समृद्धि लाता है।

✅ आज क्या करें

गृहप्रवेश, यात्रा, शिक्षा, व्यापार

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: तृतीया (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: बुधवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पुनर्वसु
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: ध्रुव
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न