22 मई 2026 का पंचांग – षष्ठी शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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22 मई 2026 का पंचांग

षष्ठी | शुक्ल पक्ष | ज्येष्ठ

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तिथि
षष्ठी
नक्षत्र
आश्लेषा
🌿
योग
वृद्धि
📿
करण
तैतिल
शहर चुनें:
🌅 05:43 AM   🌇 07:04 PM

📅 पंचांग22 मई 2026

तिथिषष्ठी (शुक्ल पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारशुक्रवार
नक्षत्रआश्लेषा (सर्प)
योगवृद्धि
करणतैतिल
चंद्र राशिकर्क
सूर्य राशिवृष
🌅 सूर्योदय05:43 AM
🌇 सूर्यास्त07:04 PM

🪐 ग्रह दशा22 मई 2026

☀️सूर्यवृष6.7°
🌙चंद्रकर्क18.4°
मंगलमीन11.6°
बुधमिथुन8.4°
गुरुकर्क0.9°
शुक्रकर्क28.3°
शनिमीन17.9°
राहुकुंभ10.5°
केतुसिंह10.5°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं


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🌙 आज की तिथि का महत्व

षष्ठी · शुक्ल पक्ष

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व्रत / पर्व: स्कंद षष्ठी, छठ पूजा, सूर्य षष्ठी

षष्ठी तिथि कार्तिकेय और षष्ठी माता को समर्पित है। माताएं संतान की कुशलता के लिए इस दिन विशेष व्रत रखती हैं।

✅ आज क्या करें

कार्तिकेय पूजा, सूर्य अर्घ्य, संतान के लिए प्रार्थना

⚠️ आज से बचें

मांसाहार, बुरी संगत

⭐ आज का नक्षत्र: आश्लेषा

देवता: सर्प

आश्लेषा सर्पदेवता का नक्षत्र है। गूढ़ विद्याओं और औषधि के कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

औषधि, तंत्र-मंत्र, गूढ़ विद्या

⚠️ आज से बचें

विवाह, शुभ यात्रा

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: षष्ठी (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शुक्रवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: आश्लेषा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: वृद्धि
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न