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Tilak Kathayein

Tilak Kathayein એ TilakKathayein ની સંપાદકીય ટીમ છે, જે પ્રામાણિક શાસ્ત્રો પર આધારિત હિંદુ કથાઓ, આરતી, ચાળીસા, મંત્ર અને પંચાંગ પ્રકાશિત કરે છે.

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ब्लॉग

धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202621
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ब्लॉग

शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202649
सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य
ब्लॉग

सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

महाभारत के 'स्वर्गारोहण पर्व' के अनुसार, शकुनि को स्वर्ग मिलने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, उसने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए सहदेव के विरुद्ध सम्मुख लड़कर वीरगति प्राप्त की थी। दूसरा, कर्मफल के शास्त्रीय नियम के अनुसार, जिस जीव के पाप अधिक और पुण्य बहुत कम होते हैं, उसे अपने अल्प पुण्यों का भोग करने के लिए पहले कुछ समय के लिए स्वर्ग प्राप्त होता है, जिसके समाप्त होने पर वह दीर्घकालीन नरक में जाता है। तीसरा, यह युधिष्ठिर के अहंकार और द्वेष की शुद्धि के लिए देवराज इंद्र और धर्मराज द्वारा रची गई एक मायावी परीक्षा थी।

25 Oct 202640
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कहानियाँ

5 अप्सराओं का उद्धार: जब अर्जुन ने तोड़ा मगरमच्छ का श्राप

महाभारत के अनुसार, अपने 12 वर्ष के तीर्थाटन के दौरान अर्जुन ने दक्षिण के पंच तीर्थों में प्रवेश कर मगरमच्छ रूपी पाँचों शापित अप्सराओं (वर्गा, सौरभेयी, समीची, बुद्बुदा और लता) को जल से बाहर खींचकर उनका उद्धार किया। एक ऋषि के 100 वर्ष पुराने श्राप से मुक्त होकर वे पुनः अपने दिव्य रूप में लौट आईं, जिसके बाद ये पवित्र सरोवर 'नारी तीर्थ' के नाम से प्रसिद्ध हुए।

24 Oct 202643
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कथाएँ

भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202674
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गरुड़ पुराण

रौरव नरक क्या है? जानिए रुरु जीव, भयानक सजा और गरुड़ पुराण की सीख | Tilak Kathayein

रौरव नरक (Raurava Narak) गरुड़ पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित सबसे भयानक और कष्टदायी नरकों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि जीवात्मा को उसके किए गए दुष्कर्मों का प्रायश्चित कराकर शुद्धि की ओर ले जाना है।

03 Oct 202691
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ब्लॉग

गरुड़ पुराण की कथाएं आज क्यों जरूरी हैं? जानिए महत्व व सीख

गरुड़ पुराण केवल मृत्यु उपरांत की यात्रा या नरक की यातनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवन में नैतिकता, दया, और सदाचार से जीने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। आधुनिक युग में जब भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए लोग नैतिक मूल्य भूल रहे हैं, तब गरुड़ पुराण का 'कर्मफल का सिद्धांत' मनुष्य को जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की गहरी सीख देता है।

30 Sep 202686
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कहानियाँ

दुर्योधन के जन्म की रात क्या हुआ था? जानिए अपशकुन, विदुर की चेतावनी और महाभारत का रहस्य

**दुर्योधन के जन्म का प्रसंग** महाभारत की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में से एक माना जाता है। कथाओं में वर्णन मिलता है कि उसके जन्म के समय वातावरण में कई अशुभ संकेत दिखाई दिए और हिंसक पशु-पक्षियों की भयावह आवाजें सुनाई देने लगीं। इन संकेतों को देखकर विदुर और अन्य विद्वानों ने धृतराष्ट्र को चेतावनी दी थी कि यह बालक कुल के लिए विनाश का कारण बन सकता है। इस लेख में जानें दुर्योधन के जन्म की रात क्या हुआ था, कौन-कौन से अपशकुन दिखाई दिए और महाभारत में इस घटना का क्या महत्व बताया गया है।

27 Sep 202685
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ब्लॉग

लक्ष्मण 14 वर्ष तक क्यों नहीं सोए? जानिए निद्रा देवी का रहस्य

रामायण के अनुसार, 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम और माता सीता की निरंतर सेवा व रक्षा करने के लिए लक्ष्मण ने निद्रा देवी से 14 वर्षों तक न सोने का वरदान मांगा था। निद्रा देवी की शर्त के अनुसार, लक्ष्मण के हिस्से की 14 वर्ष की नींद उनकी पत्नी उर्मिला ने अयोध्या के राजमहल में सोकर पूरी की। नींद पर विजय पाने के कारण ही लक्ष्मण 'गुड़ाकेश' कहलाए और इसी वरदान के बल पर वे ब्रह्मचारी व अनिद्राधारी रहकर अजेय योद्धा मेघनाद (इंद्रजीत) का वध कर सके।

24 Sep 202697
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: Grishneshwar Temple Guide & Katha

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के समीप स्थित घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर) महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में 12वां (अंतिम) ज्योतिर्लिंग है। शिव पुराण के अनुसार, अपनी परम भक्त 'घुश्मा' की अनन्य निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसके मृत पुत्र को पुनर्जीवित किया था तथा उसके विनम्र अनुरोध पर सदैव के लिए यहाँ 'घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर' ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए। लाल पत्थरों से निर्मित यह भव्य मंदिर मोक्षदायिनी ऊर्जा और अटूट भक्ति का पावन प्रतीक है।

22 Sep 2026163
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एकादशी व्रत कथा

Parivartini Ekadashi 2026: Date, Parana Time & Vrat Katha

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'परिवर्तिनी एकादशी', 'पार्श्व एकादशी' अथवा 'वामन एकादशी' कहा जाता है। चतुर्मास के शयन काल के दौरान इसी पावन तिथि पर क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान श्रीहरि विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर दैत्यराज बलि के अहंकार का दमन किया था। इस दिन भगवान वामन की पूजा और व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा समस्त पापों का क्षय होता है।

20 Sep 202696
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कहानियाँ

माता सीता का जन्म कैसे हुआ? एक श्राप से जुड़ी रहस्यमयी पौराणिक कथा

**माता सीता के जन्म** को लेकर रामायण और विभिन्न पुराणिक परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता में उनका संबंध **वेदवती** से जोड़ा जाता है, जिन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और रावण के कारण अपने जीवन का अंत कर पुनर्जन्म लेने का संकल्प किया था। आगे चलकर सीता जी का प्राकट्य राजा जनक को खेत में हल चलाते समय हुआ। इस लेख में जानें वेदवती की कथा, श्राप और पुनर्जन्म से जुड़ी मान्यता तथा माता सीता के दिव्य जन्म का रहस्य।

19 Sep 2026152