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23 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

एकादशी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
एकादशी
नक्षत्र
मूल
🌿
योग
विष्कुम्भ
📿
करण
वणिज
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🌅 06:06 AM   🌇 06:54 PM

📅 पंचांग23 अगस्त 2026

तिथिएकादशी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वाररविवार
नक्षत्रमूल (निर्ऋति)
योगविष्कुम्भ
करणवणिज
चंद्र राशिधनु
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:06 AM
🌇 सूर्यास्त06:54 PM

🪐 ग्रह दशा23 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह5.7°
🌙चंद्रधनु7.5°
मंगलवृष0.3°
बुधमिथुन29°
गुरुकर्क8.7°
शुक्रधनु27.3°
शनिमीन21°
राहुकुंभ5.6°
केतुसिंह5.6°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को रविवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌖

🌙 आज की तिथि का महत्व

एकादशी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: एकादशी व्रत (निर्जला / फलाहारी) — अत्यंत पुण्यदायी

एकादशी भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि है। इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी पाप नष्ट होते हैं।

✅ आज क्या करें

व्रत रखें, विष्णु सहस्रनाम, भागवत पाठ, तुलसी अर्पण

⚠️ आज से बचें

चावल खाना, तामसिक भोजन, क्रोध, झूठ बोलना

⭐ आज का नक्षत्र: मूल

देवता: निर्ऋति

मूल जड़ों और गहराई का नक्षत्र है। रहस्य और चिकित्सा से जुड़े कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

अनुसंधान, जड़ी-बूटी, दवाइयाँ

⚠️ आज से बचें

विवाह, नई शुरुआत

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: एकादशी (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: रविवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: मूल
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: विष्कुम्भ
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: वणिज

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न