12 जून 2026 का पंचांग – द्वादशी कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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12 जून 2026 का पंचांग

द्वादशी | कृष्ण पक्ष | ज्येष्ठ

🌙
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
अश्विनी
🌿
योग
अतिगण्ड
📿
करण
कौलव
शहर चुनें:
🌅 05:41 AM   🌇 07:13 PM

📅 पंचांग12 जून 2026

तिथिद्वादशी (कृष्ण पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारशुक्रवार
नक्षत्रअश्विनी (अश्विनी कुमार)
योगअतिगण्ड
करणकौलव
चंद्र राशिमेष
सूर्य राशिवृष
🌅 सूर्योदय05:41 AM
🌇 सूर्यास्त07:13 PM

🪐 ग्रह दशा12 जून 2026

☀️सूर्यवृष26.9°
🌙चंद्रमेष12.8°
मंगलमीन22.6°
बुधकन्या4.3°
गुरुकर्क2.7°
शुक्रकन्या2°
शनिमीन18.6°
राहुकुंभ9.4°
केतुसिंह9.4°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं


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🌙 आज की तिथि का महत्व

द्वादशी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: एकादशी पारण

कृष्ण द्वादशी में एकादशी व्रत का पारण होता है। समय पर पारण करना अत्यंत आवश्यक है।

✅ आज क्या करें

व्रत पारण, ब्राह्मण भोजन, विष्णु पूजा

⚠️ आज से बचें

पारण में अनुचित देरी

⭐ आज का नक्षत्र: अश्विनी

देवता: अश्विनी कुमार

अश्विनी गति और उपचार का नक्षत्र है। यात्रा, नई शुरुआत और चिकित्सा के कार्य इस नक्षत्र में विशेष शुभ होते हैं।

✅ आज क्या करें

यात्रा, नया व्यापार, चिकित्सा

⚠️ आज से बचें

कोई विशेष नहीं

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: द्वादशी (कृष्ण पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शुक्रवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: अश्विनी
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: अतिगण्ड
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: कौलव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न